बारिश से बचने रुके तो कट गया चालान, लखनऊ के जियामऊ पुल का वीडियो वायरल, पुलिस की संवेदनशीलता पर उठे सवाल

लखनऊ की सड़कों पर बारिश ने एक बार फिर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। राजधानी के जियामऊ पुल से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बारिश से बचने के लिए पुल के नीचे खड़े दुपहिया वाहन चालकों के चालान काटते हुए पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद लखनऊ पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बारिश से बचने की कोशिश बनी परेशानी

तेज बारिश के दौरान जियामऊ पुल के आसपास कई दुपहिया वाहन चालक सड़क किनारे और पुल के नीचे रुक गए थे। उनका मकसद सिर्फ बारिश थमने का इंतजार करना था ताकि सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकें। लेकिन इसी दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने नियमों का हवाला देते हुए बाइक सवारों के चालान काटने शुरू कर दिए। बारिश में भीगते लोगों को राहत देने के बजाय कार्रवाई किए जाने से मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या बारिश जैसी आपात स्थिति में लोगों को थोड़ी राहत नहीं दी जा सकती थी। वहीं कुछ लोगों ने इसे ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन बताया, लेकिन ज्यादातर प्रतिक्रियाएं पुलिस की संवेदनहीनता की ओर इशारा कर रही हैं।

दुर्घटनाओं पर सख्ती की बात, लेकिन व्यवहार पर सवाल

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में नवंबर तक उत्तर प्रदेश में 46,223 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24,776 लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन आंकड़ों को बेहद गंभीर बताते हुए कई बार कह चुके हैं कि एक भी सड़क दुर्घटना पूरे परिवार को जीवनभर का दर्द दे जाती है। उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता के साथ-साथ कठोर फैसलों की जरूरत पर भी जोर दिया है।

जमीनी हकीकत और नीति के बीच फासला

मुख्यमंत्री की मंशा सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती और जागरूकता बढ़ाने की जरूर है, लेकिन जियामऊ पुल की यह घटना यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या हर हालात में सिर्फ चालान ही समाधान है। बारिश से बचने के लिए रुके लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार सामने आया, उसने पुलिस की मानवीय भूमिका पर बहस छेड़ दी है।

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